15-03-15          ओम् शान्ति          अव्यक्त  बापदादा          मधुबन
 


कामकाज करते मेरा बाबा, मीठा बाबा यही दो शब्द सदा याद रहे, यह अलौकिक प्यार का सम्बन्ध ही संगमयुग की सौगात है 

ओम् शान्ति। सभी के चेहरे मुस्कराते हुए, बापदादा से आपस में एक दो को मुस्कराते हुए मिलन मना रहे हैं। आज के चेहरों में हर एक बहुत समय के बाद साकार रूप में आगे पीछे वाले नयन मिलन मना रहे हैं। हर एक का मन यही गीत गा रहा है मेरा बाबा, मीठा बाबा, प्यारा बाबा। कितनी आत्मायें बाप और बच्चों का मिलन मनाना देख खुश हो रहे हैं। सबके चेहरों पर मिलन की खुशी का चेहरा दिखाई दे रहा है। चाहे नजदीक हैं, चाहे दूर अहिं लेकिन लास्ट वालों में भी मिलन का उमंग उत्साह बापदादा को अपने तरफ आकर्षित कर रहा है। बाप के मुख से वाह मेरे दिल से याद करने वाले बच्चे वाह! बाप के दिल में बच्चे और बच्चों के दिल में बाबा। सभी के मन में मिलन की, खुशी की लहर दिखाई दे रही है। बाप भी दिल से यही गीत गा रहे हैं वाह बच्चे वाह! और बच्चे भी यही गीत गा रहे हैं वाह बाबा वाह! वाह कहने से ही सबके फेस से खुशी की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही है। वैसे तो कितना भी दूर बैठे हों लेकिन सभी के दिल में वाह बाबा वाह और बाप के दिल में वाह बच्चे वाह, शक्ल में दिल के मिलन की लहर स्पष्ट दिखाई दे रही है। मुख से गीत नहीं गा रहे हैं लेकिन हर एक के दिल का गीत शक्ल से दिखाई दे रहा है। हर एक का चेहरा हर्षितमुख से कितना मीठा मुस्करा रहे हैं। बाप भी दिल में यही गीत गा रहे हैं वाह बच्चे वाह। हर एक के चेहरे से बाप यही देख रहा है और दिल से कह रहे हैं, जो दिल का आवाज बाप के पास स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बाप का यही गीत वाह बच्चे वाह, बच्चे का भी यही गीत वाह बाबा वाह और हर एक की शक्ल में वाह-वाह के चिन्ह स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। कोई गीत के रूप में कोई दिल के आवाज के रूप में यह नयनों द्वारा अपने दिल का गीत गाते दिखाई दे रहे हैं और बाप भी एक-एक बच्चे के प्रति यही रेसपान्ड दे रहे हैं कि हर एक बच्चा दिलाराम के दिल के सितारे हैं| वाह बच्चे वाह सितारे वाह!
आज सबके सूरत में मूर्त है। बाप भी गीत में दिल में गा रहे हैं वाह हर बच्चा वाह! कितने समय की आश मुखड़ा देखने की आज प्रैक्टिकल में दिखाई दे रहा है। तो बच्चों के दिल में वाह बाबा वाह और बाप के दिल में वाह बच्चे वाह, यह दिल का गीत सभी को अपना भी सुनाई दे रहा है और सर्व का भी सुनाई दे रहा है। बापदादा हर बच्चे का दिल का गीत ऐसे ही स्पष्ट सुन रहे हैं जैसे सामने से हर बच्चा गा रहा है। और बापदादा उसी दिल के गीत को सुनते-सुनते बहुत दुलार ले रहा है। बाप सुनते हुए यही दिल का रेसपान्ड दे रहे हैं वाह हर बच्चा वाह! हर एक के जितने भी बैठे हैँ हर एक के दिल में मेरा बाबा, मेरा यही आवाज आ रहा है और बाप रेसपान्ड दे रहे हैं हर बच्चे को। चाहे कितने भी दूर हैं, यहाँ तो हैं लेकिन और देशों में भी सभी के मुख से वाह बाबा वाह का गीत बापदादा सुन रहे हैं। हर एक बच्चा वाह बाबा वाह, मेरा बाबा वाह, इसमें ही समाया हुआ है। दिल का गीत है इसलिए आवाज सुनाई नहीं देता है लेकिन बाबा को सभी का आवाज पहुंच रहा है। बापदादा भी रेस्पोंड में कह रहे हैं वाह बच्चे वाह। हर एक के दिल में कौन? सभी क्या कह रहे हैं? मेरा बाबा। यह गीत तो सुना है ना बाप बच्चों का। बाप कहते हैं मेरा बच्चा, बच्चे कहते हैं मेरा बाबा। कितना मीठा आवाज है। बस मेरा जो कह रहे हैं ना, उसकी कमाल है। हर एक की दिल कह रही है मेरा बाबा। बाप की दिल हर एक बच्चे प्रति कह रही है मेरा बच्चा क्योंकि साकार रूप में तो गुप्त दिल की बात है लेकिन हर एक के दिल का आवाज बाप की दिल में स्पष्ट सुनाई देता है। बच्चे कहते हैं मेरा बाबा और बाप कहते हैं मेरा बच्चा। यह बाप और बच्चों का मिलन क्या होता है। यह तो हर एक अनुभवी है। हर एक के मुख से यही शब्द निकलते हैं वाह मेरा बाबा वाह। हर एक को रेसपान्ड भी मिल रहा है वाह बच्चे वाह! लेकिन यह मिलन विचित्र है। सब रेसपान्ड में वाह बाबा वाह कह रहे हैं, लेकिन हर एक अपने-अपने दिल से अपने आवाज में कह रहे हैं और बापदादा इतने सब बच्चों का रेसपान्ड सुन, दिल का प्यार देख कितना हर्षित हो रहे हैं। वह तो अभी इस संगठन में बच्चे जाने बाप का, बाप जाने बच्चों का। दोनों वाह वाह वाह कह रहे हैं और बाप सुन सुनके सभी बच्चों को रेसपान्ड दे रहे हैं, हर घड़ी यही मुख से हर बच्चा गाते रहते वाह बाबा, वाह मेरा बाबा, वाह प्यारा बाबा, वाह दिल में समाने वाला बाबा। आपका प्यार आप जाने और मैं जानूं। हर एक का चेहरा अगर आप आके देखो तो सबके चेहरे मैजारिटी ऐसे लगते हैं जैसे बहुत समय से प्यार में समाये हुए बच्चे दिल में कह रहे हैं वाह वाह वाह। वाह वाह की धुन हर एक बच्चे के दिल से सुनाई दे रही है। सबके दिल में कौन! क्या कहेंगे? मेरा बाबा, मीठा बाबा, प्यारा बाबा। और बाप के दिल में कौन? बस अभी तो मेरे और मीठे दो शब्द याद करना। मीठे बाबा मेरे बाबा। हर एक बच्चे के मन से देखो तो कौन समाया हुआ है दिल में? मेरा बाबा। हर एक के दिल में मेरा बाबा, मेरा बाबा है क्योंकि यह प्यार बाप और बच्चों का अलौकिक प्यार, यह सारे कल्प में इसी जन्म में अनुभव करने वाला है। तो बोलो, हर एक के दिल में कौन? मेरा बाबा। हर एक का चेहरा कितना मुस्करा रहा है। बापदादा तो सामने देख रहे है। हर एक बच्चा दिल से मेरा बाबा कहते हुए ऐसे समा जाता है जो बाप और बच्चों के मिलन का चित्र सदा के लिए हर एक के दिल में छप जाता है। अभी इसमें तो पास हैं कि सबके दिल में बाबा की याद है, कभी भूल भी जाती है कोई हिसाब किताब के कारण लेकिन मैजारिटी थोड़ा भूलती है, मेरा बाबा यह जिगर से इतना पक्का हो गया है जो चलते फिरते सब कहते हैं मेरा बाबा मेरा बाबा यह भूलता नहीं है। और बाप को भी क्या याद रहता है? मेरे बच्चे। रहता है ना। सबके दिल में कौन? पक्का, पक्का? कमाल तो यही है कि यहाँ बच्चों के दिल में बाबा है, वैसे जीवन में साथी याद रहता है लेकिन यहाँ हर एक के दिल से पूछो, दिल में कौन? कहेंगे मेरा बाबा। दिल में कौन? मेरा बाबा। बाबा की बातें ही हर कर्म करते याद रहती हैं। सारा दिन देखो चेक करो काम काज करते भी याद किसकी है? कापी किसको करते हैं? साकार में क्या दिखाई देता है? बाप के दिल में मैं, और मेरे दिल में बाप। ऐसे हैं ना! हाथ उठाओ। ऐसे हैं? पक्का है? वैसे कहते काम काज करते भूल जाता है लेकिन यहाँ भूलने का नाम नहीं लेते। और बाप की दिल में कौन? मेरे बच्चे। यह सम्बन्ध संगमयुग की सौगात है। अच्छा।
आज का मिलन तो सबका हुआ। अभी यह मिलन सदा ही याद रहेगा, आत्मा और परमात्मा का मिलन साधारण मिलन नहीं है। किससे भी पूछो आपके दिल में कौन? सब कहते हैं मेरा बाबा। कितना जिगरी प्यार है।
सेवा का टर्न - ईस्टर्न जोन (बंगाल बिहार, उड़ीसा, आसाम, नेपाल और तामिलनाडु के 21 हजार आये हैं) बाप भी यह मिलन भूल नहीं सकता। जब भी बाप को टाइम मिलता है तो क्या दिल में होता है? मेरे बच्चे। लाडले बच्चे और बच्चों को टाइम मिलता तो मेरा बाबा। ऐसे है ना! ऐसे है हाथ उठाओ। भूलने की चीज ही नहीं है। कितना भी भूलने की कोशिश करो लेकिन भूलते हुए भूल नहीं सकता। (सभी खड़े हुए) काफी आये हैं। अपने टर्न में सेवा के लिए अच्छे आये हैं। बाप और यज्ञ सेवा से सभी का प्यार है। क्योंकि यह सेवा और मिलन दोनों ही साथ में हो जाता है।
नेपाल से 2500 आये हैं:- बहनें भी हाथ उठायें। अच्छा है बापदादा को भी अगर कोई बच्चा नजदीक से नहीं मिलता तो याद तो आता है ना इसलिए यह मिलन का तरीका बहुत अच्छा है। तो सभी खुश हैं? खुश हैं दो-दो हाथ उठाओ। अगर हैं तो?
तामिलनाडु से 4500 आये हैं:- काफी लोग आये हैं, मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा है। रेसपान्ड अच्छा है।
डबल विदेशी 1200 आये हैं:- यह चांस इतने ब्राह्मणों का मिलना यह भी बड़ा भाग्य है। कहाँ-कहाँ से आते हैं और कितने उमंग से आते हैं। बापदादा को एक-एक बच्चे को देख खुशी होती है और एक-एक को सेवा में आने की मुबारक दे रहे हैं। बहुत अच्छा।
बापदादा को सभी बच्चों का टर्न बाई टर्न सेवा में आना बहुत अच्छा लगता है और यज्ञ सेवा हर एक ग्रुप बहुत प्यार से कर रहे हैं, किया है और अभी भी करेंगे। हर एक ग्रुप को बापदादा दिल से रिटर्न दे रहे हैं और सोचा जाए तो यह यज्ञ है किसका? हर एक यज्ञ निवासी का यज्ञ है ना! आप सबका असली घर कहाँ है? यही है ना! कहेंगे कहाँ से आप आये हैं? तो यही कहेंगे ना आबू के हैं। भले कहाँ के भी हो लेकिन वह भी कहाँ है? तो सभी ने सीजन में अपने-अपने पार्ट में अच्छा सहयोग दिया है, सेवा को पूरा किया है, इसकी बापदादा हर बच्चे को खास मुबारक दे रहे हैं।
दादी जानकी जी से:- यज्ञ में एक एक्साम्पुल है। बीमार भी है और हाजिर भी है। अगर दादी क्लास में नहीं आवे तो खाली-खाली लगता है। (गुल्ज़ार दादी, दादी का डाक्टर है, समय पर ठीक कर देती है) किसने भी किया? हिम्मत तो दादी की है ना। अच्छा है। सभी की देखो नज़र है। हमारी दादी, हमारी दादी। जैसे मेरा बाबा है वैसे मेरी दादी है।
मोहिनी बहन:- (हॉस्पिटल की यात्रा करके आई है) अभी तो आ गई। मुबारक है। रोज थोड़ा कुछ न कुछ हो जाता है, होते हुए भी समय पर तैयार हो जाए, तो अच्छा है ना! पहुंच तो जाती है। मुबारक हो। मुबारक हो। अच्छा है। हिम्मत है।
न्यूयार्क की मोहिनी बहन ने याद भेजी है:- हिम्मत अच्छी रखी है। टाइम लगाया जरूर है लेकिन हिम्मत रख करके अपने को सेफ कर लिया है। (अभी ठीक हो जायेगी) अभी हो जायेगी। बाबा की याद क्या, सभी की याद है।
बृजमोहन भाई, निर्वैर भाई:- अभी तो हॉस्पिटल छोड़ी ना। अभी तो हॉस्पिटल नहीं जायेंगे ना। (4 दिन के लिए जायेंगे) चार दिन के बाद समाप्त। चार दिन के बाद ठीक हो जायेंगे। अच्छा है। अभी सभी ओ.के. हों, वह दिन मनायेंगे। कोई न कोई मतलब कारण से होता है।
बृजमोहन भाई:- यह भी ठीक हो गये हैं। (रमेश भाई से) यह तीनों ही भाई ठीक हैं ना!
विदाई के समय:- (बापदादा ने माइक लगाने की छुट्टी नहीं दी लेकिन यह महावाक्य उच्चारण किये) जो पुरानी बाते हैं उसको भुला दो, पास्ट इज पास्ट। पुरानी बातें सामने आती हैं तो बाबा याद नहीं रहता, अभी एक शिवबाबा को ही याद करो। अभी बहुत पावरफुल योग की जरूरत है, सब तरफ यह बता दो और सब पुरानी बातें मिटा करके एक बाबा के योग से पावरफुल वातावरण बनाओ और नये सेवा के कुछ प्लैन बनाओ। जब कुछ सेवा का प्रोग्राम बनता है, उसमें अगर अलग-अलग हो जाते हैं तो वह सेवा का प्लैन सफल नहीं होता है, परन्तु संगठन की शक्ति से ही वो सेवा का प्लैन सफल होगा, अभी 10 मिनट अच्छी तरफ से साइलेन्स का अनुभव करो, योग लगाओ। अच्छा!